अपनी आवाज बने
“जब हम खुद की आवाज़ खुद बन जाते हैं, तो वह आवाज़ प्रत्येक निष्पक्ष व्यक्ति को उतनी ही गंभीरता से सुनाई देती है, जितनी गंभीरता से वह हमारे हृदय से निकलती है।”
खुद को जागृत बनाये
“खुद को न्याय के लिए जागरूक करना होगा, शोषण तभी होता है जब तक व्यक्ति जागरूक और सचेत नहीं होता।”
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भ्रष्टाचार को मिटाना
“जब भ्रष्टाचार चरम पर हो, मानवों का शोषण हो रहा हो, फिर एक जागरूक व्यक्ति कैसे चुप रह सकता है?”
“भ्रष्टाचार का दानव जिस प्रकार से मानव जीवन को अस्त-व्यस्त कर रहा है, उससे कोई भी व्यक्ति प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकता।”

संवैधानिक संस्थाओं को मजबूत करना
“जब संवैधानिक संस्थाओं का पतन हो रहा हो, जो पुलिस अपना काम सही से न करती हो, नकली फर्जी रिपोर्ट लगाकर आरोपियों को बचाती हो, तब जागरूक लोग अपने देश को बचाते हैं और संवैधानिक संस्थाओं को मजबूत करते हैं।”
“अन्याय, अत्याचार, शोषण आखिर है क्या? व्यक्ति के मूल अधिकारों का हनन ही अन्याय, अत्याचार और शोषण है।”

हमारे बुनियादी हक
“हक और अधिकार व्यक्ति के जीवन के मूल आधार हैं। इनसे समझौता करना अपने आपको खुद अन्याय और शोषण के लिए प्रस्तुत करने जैसा है।”
अधिकार और हक किसी भी इंसान के अस्तित्व की सबसे जरूरी बुनियाद होते हैं। अगर कोई व्यक्ति इनसे समझौता कर लेता है या इन्हें छोड़ देता है, तो इसका मतलब यह है कि वह खुद अपराधियों और शोषण करने वालों को न्योता दे रहा है कि वे आकर उस पर और अधिक अन्याय करें।””.
हर बदलाव की शुरुआत विचारों से प्रारंभ होती है
“जो लोग अपने हक-अधिकार के लिए खड़े नहीं हो सकते, वे आत्मसम्मान का जीवन कभी नहीं जी सकते। भारतीय संविधान हमें हक से जीने का अधिकार देता है और रोज़गार करने का अधिकार भी देता है। सरकारों का भी यह दायित्व है कि लोगों को उनके काम के बदले उचित मेहनताना प्राप्त हो।”
आत्मसम्मान और साहस: जो व्यक्ति अपने अधिकारों के लिए आवाज नहीं उठाता, उसे समाज में वह सम्मान (Self-respect) नहीं मिलता जिसका वह हकदार है। सम्मान पाने के लिए निडर होना जरूरी है।
संवैधानिक अधिकार: भारत का संविधान हर नागरिक को गरिमा के साथ जीने और अपनी पसंद का काम या व्यवसाय करने की आजादी देता है।
सरकार की जिम्मेदारी: यह सरकार का कर्तव्य है कि वह सुनिश्चित करे कि किसी भी कामगार (जैसे CSC संचालक या डिजिटल ऑपरेटर) का शोषण न हो और उसे उसकी मेहनत का पूरा और सही फल (Fair Pay) मिले।


“सच्चाई के रास्ते पर अकेला चल निकला हूँ, देखते हैं कारवां कब बनता है”
MANOJ
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