स्टाम्प विक्रेता का संघर्ष

शीर्षक: स्टाम्प विक्रेता: सरकारी काम का जरिया, पर खुद बेसहारा

सामग्री:

स्टाम्प विक्रेता – वो छोटा सा दुकानदार जो आपके दस्तावेजों को कानूनी बनाता है। लेकिन उसके अपने अधिकार कौन सुनता है?

कौन हैं स्टाम्प विक्रेता? रजिस्ट्री, एग्रीमेंट, एफिडेविट – हर कानूनी दस्तावेज़ में स्टाम्प पेपर की जरूरत होती है। और यह काम करते हैं स्टाम्प विक्रेता।

मुख्य समस्याएं:

1. डिजिटल स्टाम्प का झटका ई-स्टाम्प आने के बाद पारंपरिक स्टाम्प विक्रेताओं का धंधा खत्म होने के कगार पर।

2. कम मार्जिन 1000 रुपये के स्टाम्प पर सिर्फ 1-2% कमीशन। उससे दुकान, बिजली, कर्मचारी का खर्च कैसे चले?

3. कभी-कभी स्टाम्प के मामले में निर्दोष विक्रेता को भी फंसा दिया जाता है।

4. लाइसेंस का झंझट हर साल लाइसेंस रिन्यूअल की मुसीबत। कभी-कभी बिना कारण लाइसेंस रद्द।

5. सरकारी उपेक्षा कोई संगठन नहीं, कोई यूनियन नहीं। अकेले पड़ जाते हैं।

हमारी मांगें:

  1. डिजिटल युग में भी जगह: ई-स्टाम्प का काम भी विक्रेताओं को दिया जाए
  2. उचित कमीशन: कम से कम 3-5% मार्जिन
  3. कानूनी सुरक्षा: धोखाधड़ी के मामलों में सुरक्षा
  4. आसान लाइसेंस: ऑनलाइन और तुरंत रिन्यूअल
  5. पुनर्वास योजना: पुराने विक्रेताओं के लिए

स्टाम्प विक्रेता भी इस देश के नागरिक हैं। उन्हें भी जीने का हक है।

क्या आप स्टाम्प विक्रेता हैं? अपनी आवाज़ बुलंद करें।

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