राशन डीलर की व्यथा

शीर्षक: “सरकारी राशन बांटते हैं, पर खुद भूखे सोते हैं” – राशन डीलरों की अनसुनी कहानी

सामग्री:

राशन डीलर – वो लोग जो गरीबों तक सरकारी राशन पहुंचाते हैं, लेकिन खुद उनकी समस्याओं को कोई नहीं सुनता।

मुख्य समस्याएं:

1. कमीशन की मार प्रति किलो गेहूं पर बहुत कम कमीशन। इतने में दुकान का किराया, बिजली, कर्मचारी का खर्च कैसे चले?

2. भुगतान में देरी कई बार 4-6 महीने तक भुगतान नहीं मिलता। बैंक से लोन लेना पड़ता है।

3. ग्राहकों का गुस्सा राशन की गुणवत्ता खराब हो तो डीलर को ही दोष मिलता है, जबकि वो खुद इसमें कुछ नहीं कर सकता।

4. सरकारी निरीक्षण का डर छोटी-छोटी गलतियों पर भारी जुर्माना। कभी-कभी लाइसेंस तक रद्द कर दिया जाता है।

5. डिजिटल राशन कार्ड की समस्या ePoS मशीन बार-बार खराब होती है, लेकिन जिम्मेदारी डीलर की।सर्वर की समस्या अलग और बहुत बड़ी

6. भंडारण की समस्या चूहे, नमी से राशन खराब हो जाता है, लेकिन नुकसान डीलर को उठाना पड़ता है।

हमारी मांगें:

  1. कमीशन बढ़ाया जाए: कम से कम 3-5 रुपये प्रति किलो
  2. समय पर भुगतान: हर महीने की 10 तारीख तक
  3. बीमा और पेंशन: सामाजिक सुरक्षा योजना
  4. तकनीकी सहायता: ePoS मशीन की मुफ्त मरम्मत ओर सर्वर समस्या का तुरंत समाधान हो
  5. सम्मानजनक व्यवहार: अधिकारियों से

राशन डीलर भी इंसान हैं, उनके परिवार हैं। उन्हें भी सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार है।

क्या आप एक राशन डीलर हैं? अपनी समस्या हमसे साझा करें।

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